डॉ.कविता'किरण'( कवयित्री) Dr.kavita'kiran' (poetess)

नाम मेरा 'किरण' है ऐ साहिब!मेरे अंदर मेरा उजाला है-डॉ.कविता"किरण" I AM LIGHT OF LOVE,LET ME SPREAD IN YOUR HEART AND YOUR LIFE-Dr.kavita'kiran'

Friday, January 22, 2010

एक ग़ज़ल श्रंगार की

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मुझमें जादू कोई जगा तो है मेरी बातों में इक अदा तो है नज़रें मिलते ही लडखडाया वो मेरी आँखों में इक नशा तो है आईने रास ...
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Monday, January 11, 2010

'काव्य रत्न' सम्मान ग्रहण करते हुए कवियत्री डॉ कविता'किरण'

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२५ दिसंबर ०९ को पानीपत में ' काव्य रत्न ' सम्मान ग्रहण करते हुए कवियत्री डॉ कविता ' किरण ' कलम अपनी , जुबां ...
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Wednesday, December 30, 2009

ज़ख्म छुपाकर तू अपना,नए साल का गीत सुना...

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नए साल की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ एक गीत पेशे - खिदमत है . ..- ज़ख्म छुपाकर तू अपना नए साल का गीत सुना आज के दिन रोना हैं ...
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Monday, December 21, 2009

आ जाओ जिंदगी में नए साल की तरह....:)))

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सभी पढ़नेवालों को क्रिसमस और नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ बतौर तोहफा एक ग़ज़ल पेश कर रही हूँ.अपनी राय से ज़रूर नवाजें - ...
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Sunday, December 13, 2009

कविता और कविता

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Thursday, November 26, 2009

इस कदर कोई सताए तो सही

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गैर को ही पर सुनाये तो सही शेर मेरे गुनगुनाये तो सही जी नहीं हमसे रकीबों से सही आपने रिश्ते निभाए तो सही है मिली किस बात की हमको सज़ा ये को...
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Wednesday, November 18, 2009

कवियत्री कविता'किरण' के गीत संग्रह ' ये तो केवल प्यार है' का विमोचन

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गत १६ नवम्बर को हिंदी अकादमी दिल्ली के उपाध्यक्ष प्रो.श्री अशोक चक्रधर की संस्था 'जय जैवन्त...
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Thursday, November 12, 2009

जिंदगी को जुबान दे देंगे

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कवयत्री डॉ कविता 'किरण 'उज्जैन में प्रसिद्द 'टेपा सम्मान ' लेते हुए ग़ज़ल जिंदगी को जुबान दे दे...
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Monday, November 9, 2009

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कवियत्री डॉ . कविता ' किरण ' इलाहबाद में ' सर्वश्रेष्ठ कवयित्री ' का अवार्ड ग्रहण करते हुए
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ले जाओ अपना दिल भी अगर छोड़ गए हो!

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' हुडदंग २००९ ' इलाहबाद होली के अवसर पर आयोजित कवि सम्मलेन के मंच पर गज़ल वापस न लौटने की ख़बर छोड़ गए हो मैंने...
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Tuesday, November 3, 2009

वक्त लिखता है वो नगमें

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धूप है , बरसात है, और हाथ में छाता नहीं दिल मेरा इस हाल में भी अब तो घबराता नहीं मुश्किलें जिसमें न हों वो जिंदगी क्या जिंदगी राह हो आस...
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Wednesday, October 28, 2009

(मेरा सृजन संसार)

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गम बाँटने को अपना लिक्खी है कुछ किताबें जिनको पढेग...
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Monday, October 26, 2009

अपने बारे में

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**** इस ब्लॉग पर अपनी उपस्थिति दर...
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रिश्ते!

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रिश्ते! गीली लकड़ी की तरह सुलगते रहते हैं सारी उम्र। कड़वा कसैला धुँआ उगलते रहते हैं। पर कभी भी जलकर भस्म नही होते। ख़त्म नही होते। सताते है...
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Wednesday, October 21, 2009

व्यर्थ नहीं हूँ मैं!

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व्यर्थ नहीं हूँ मैं! जो तुम सिद्ध करने में लगे हो बल्कि मेरे कारण ही हो तुम अर्थवान अन्यथा अनर्थ का पर्यायवाची होकर रह जाते तुम। मैं स्त्री ...
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Wednesday, October 14, 2009

दिल पे कोई नशा न तारी हो

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दिल पे कोई नशा न तारी हो रूह तक होश में हमारी हो कुछ फकीरों के संग यारी हो जेब में कायनात सारी हो हैं सभी हुस्न की ...
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Tuesday, October 13, 2009

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चाँद धरती पे उतरता कब है आईना रोज़ संवरता कब है अक्स पानी पे ठहरता कब है हमसे कायम ये भरम है वरना चाँद धरती पे उतरता कब है न ...
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Dr. kavita 'kiran' (poetess)
Falna, Rajasthan, India
कलम अपनी,जुबां अपनी, कहन अपनी ही रखती हूँ, अंधेरों से नहीं डरती "किरण" हूँ खुद चमकती हूँ, ज़माना कागजी फूलों पे अपनी जां छिड़कता है मगर मैं हूँ की बस अपनी ही खुशबू से महकती हूँ-- **** इस ब्लॉग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का मकसद फ़क़त एक कोशिश है ख़ुद को ख़ुद से बाहर लाने की। बहुत कुछ अनकहा कह देने की। अपने खास लम्हों की कहन को आम कर देने की। इस ब्लॉग के जरिये मैं ख़ुद को समेटकर अपनी अनुभूतियों के विस्तृत आकाश को दुनिया के सामने फैला रही हूँ और दावत देती हूँ सभी काव्यप्रेमियों को अपने इस सृजन के आकाश में उडान भरने के लिए। दरअसल जिंदगी के कैनवास पर वक्त की तूलिका ने जब, जिन रंगों से, जो चित्र उकेरे, यह ब्लॉग उसी की एक चित्रावली है. एक शब्दावली, जो आपके कानों तक पहुंचना चाहती है। एक द्रश्यावली जो आपकी नज़र को छू के गुजरना चाहती है, आपके सामने है। सफर में हूँ । मंजिल तक पहुंचना चाहती हूँ। कब पहुँचती हूँ ! देखते हैं*******
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