डॉ.कविता'किरण'( कवयित्री) Dr.kavita'kiran' (poetess)

नाम मेरा 'किरण' है ऐ साहिब!मेरे अंदर मेरा उजाला है-डॉ.कविता"किरण" I AM LIGHT OF LOVE,LET ME SPREAD IN YOUR HEART AND YOUR LIFE-Dr.kavita'kiran'

Wednesday, September 29, 2010

कब तलक काबा ओ काशी जायेगा.....

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कब तलक काबा ओ काशी जायेगा क्या कभी खुद की तरफ भी जायेगा ? हमसफ़र होगी फ़क़त नेकी _ बदी साथ में पंडित ना काजी जायेगा ए...
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Wednesday, September 15, 2010

कविताकिरण -नेपाल -यात्रा (एक रिपोर्ट)

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दिनांक 7,8 व 9 सितंबर 2010 को काठमांडू में त्रिदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन नेपाल , काठमांडू स्थित भारतीय राजदूतावास एवं भारतीय ...
Saturday, September 4, 2010

(५ से १० सित।तक नेपाल-यात्रा पर रहूंगी. सभी मित्रों की शुभकामनाये और आशीर्वाद अपेक्षित है...)

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दिनांक 6,7,8 सितम्बर2010 को नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित होनेवाले तीन दिवसीय हिंदी समारोह में भाग लेने हेतु "भारतीय सांस...
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Wednesday, September 1, 2010

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाये

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ओ साँवरिया! कैसे काटूं ये कोरी कुआँरी उमरिया ओ सांवरिया! अब तो अधरों पे धर ले बनाके बाँसुरिया ओ सांवरिया! राह तकते नयन मेरे पथरा गये आ गये स...
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Sunday, August 22, 2010

रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर ***********

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  नहीं चाहिए मुझको हिस्सा माँ-बाबा की दौलत में चाहे वो कुछ भी लिख जाएँ भैया मेरे ! वसीयत में नहीं चाहिए मुझको झुमका चूड़ी पायल और क...
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Wednesday, August 11, 2010

माया के परदे में क्या मन दिखता है कहीं धूप में तारों का तन दिखता है

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माया के परदे में क्या मन दिखता है कहीं धूप में तारों का तन दिखता है जब भी मन करता है जी भरकर बरसे बरसातों को मेरा आँगन दिखता ह...
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Friday, July 30, 2010

छुपके सिरहाने में रोते हैं , लोग दीवाने क्यों होते हैं

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छुपके सिरहाने में रोते हैं लोग दीवाने क्यों होते हैं हर गहरी साजिश के पीछे दोस्त पुराने क्यों होते हैं बन गये दिल पर बोझ...
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Tuesday, July 20, 2010

'दर्द'! तुझको पनाह देने को ......

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'दर्द'! तुझको पनाह देने को एक दिल था उसे भी दे डाला ************** डॉ कविता ' किरण '
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Sunday, July 4, 2010

चट्टानों पर जब पानी बरसा होगा

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चट्टानों पर जब पानी बरसा होगा मिटटी का दामन कितना तरसा होगा सागर भरकर भी ना प्यासी रह जाऊं गागर के भीतर कोई डर - सा होग...
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Wednesday, June 9, 2010

बहुत है ख़ामोशी तुम्ही कुछ कहो ना!..

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बहुत है ख़ामोशी तुम्ही कुछ कहो ना! है हरसू उदासी तुम्ही कुछ कहो ना! मैं पतझड़ का मौसम हूँ चुप ही रहा हूँ ओ गुलशन के वासी! तुम्ही कुछ कहो ना! ...
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Tuesday, June 1, 2010

अजनबी अपना ही साया हो गया है --वर्तमान पीढ़ी पर कुछ शेर...

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अजनबी अपना ही साया हो गया है खून अपना ही पराया हो गया है मांगता है फूल डाली से हिसाब मुझपे क्या तेरा बकाया हो गया है ...
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Monday, May 24, 2010

watch me on DD1 (national channal)at 7.15 pm to 8pm on 26 may (wednesday)in programme "Chalo chakradhar chaman mein" n the topic is "Vradhhashram"

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watch me on DD1 (national channal) at 7।15 pm to 8pm on 26 may (wednesday) in programme "Chalo chakradhar chaman mein" n the topic...
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Monday, May 17, 2010

ख्वाब आते रहे ख्वाब जाते रहे नींद ही में अधर मुस्कुराते रहे

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ख्वाब आते रहे ख्वाब जाते रहे नींद ही में अधर मुस्कुराते रहे सुरमई साँझ इकरार की थी मगर रस्म इनकार की हम निभाते रहे चांदनी रात में कांपती ल...
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Saturday, May 1, 2010

आज मजदूर दिवस है. और इस अवसर पर मैं मजदूर की पीड़ा का रेखांकन करती हुई, उनकी संवेदनाओं से जुडी हुई एक ग़ज़ल बयान करना चाहती हूँ. कृपया इसे नवाजें..

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अबके तनख्वा दे दो सारी बाबूजी अब के रख लो लाज हमारी बाबूजी इक तो मार गरीबी की लाचारी है उस पर टी . बी . की ...
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Dr. kavita 'kiran' (poetess)
Falna, Rajasthan, India
कलम अपनी,जुबां अपनी, कहन अपनी ही रखती हूँ, अंधेरों से नहीं डरती "किरण" हूँ खुद चमकती हूँ, ज़माना कागजी फूलों पे अपनी जां छिड़कता है मगर मैं हूँ की बस अपनी ही खुशबू से महकती हूँ-- **** इस ब्लॉग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का मकसद फ़क़त एक कोशिश है ख़ुद को ख़ुद से बाहर लाने की। बहुत कुछ अनकहा कह देने की। अपने खास लम्हों की कहन को आम कर देने की। इस ब्लॉग के जरिये मैं ख़ुद को समेटकर अपनी अनुभूतियों के विस्तृत आकाश को दुनिया के सामने फैला रही हूँ और दावत देती हूँ सभी काव्यप्रेमियों को अपने इस सृजन के आकाश में उडान भरने के लिए। दरअसल जिंदगी के कैनवास पर वक्त की तूलिका ने जब, जिन रंगों से, जो चित्र उकेरे, यह ब्लॉग उसी की एक चित्रावली है. एक शब्दावली, जो आपके कानों तक पहुंचना चाहती है। एक द्रश्यावली जो आपकी नज़र को छू के गुजरना चाहती है, आपके सामने है। सफर में हूँ । मंजिल तक पहुंचना चाहती हूँ। कब पहुँचती हूँ ! देखते हैं*******
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