डॉ.कविता'किरण'( कवयित्री) Dr.kavita'kiran' (poetess)

नाम मेरा 'किरण' है ऐ साहिब!मेरे अंदर मेरा उजाला है-डॉ.कविता"किरण" I AM LIGHT OF LOVE,LET ME SPREAD IN YOUR HEART AND YOUR LIFE-Dr.kavita'kiran'

Monday, December 20, 2010

हर तरफ उनके ख़यालों की महकती बज़्म है......

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हर तरफ उनके ख़यालों की महकती बज़्म है आजकल ये दिन शुरू उन से उन्ही पर ख़त्म है आप ही से हर ग़ज़ल है आप ही की न...
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Tuesday, December 7, 2010

मेरी सांसों में रु-ब-रु हो जा...(एक सूफीयाना ग़ज़ल पेश है..)

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मेरी सांसों में रु - ब - रु हो जा मेरे जीने की आरज़ू हो जा हर तरफ तू ही तू दिखाई दे हर तरफ...
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Thursday, November 4, 2010

दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...

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होली और दीवाली पर तो आते - जाते रहा करें कम से कम त्योहारों पर हम इक दूजे से मिला करें बारह महीनों में इक दिन आता है...
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Tuesday, October 19, 2010

दिल से मिटती नहीं चुभन उसकी....

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दिल से मिटती नहीं चुभन उसकी रूह पर नक्श है छुअन उसकी कभी मेले , कभी अकेले में याद आती रही कहन उसकी सर्द साँसों को मिल ग...
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Wednesday, September 29, 2010

कब तलक काबा ओ काशी जायेगा.....

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कब तलक काबा ओ काशी जायेगा क्या कभी खुद की तरफ भी जायेगा ? हमसफ़र होगी फ़क़त नेकी _ बदी साथ में पंडित ना काजी जायेगा ए...
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Wednesday, September 15, 2010

कविताकिरण -नेपाल -यात्रा (एक रिपोर्ट)

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दिनांक 7,8 व 9 सितंबर 2010 को काठमांडू में त्रिदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन नेपाल , काठमांडू स्थित भारतीय राजदूतावास एवं भारतीय ...
Saturday, September 4, 2010

(५ से १० सित।तक नेपाल-यात्रा पर रहूंगी. सभी मित्रों की शुभकामनाये और आशीर्वाद अपेक्षित है...)

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दिनांक 6,7,8 सितम्बर2010 को नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित होनेवाले तीन दिवसीय हिंदी समारोह में भाग लेने हेतु "भारतीय सांस...
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Wednesday, September 1, 2010

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाये

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ओ साँवरिया! कैसे काटूं ये कोरी कुआँरी उमरिया ओ सांवरिया! अब तो अधरों पे धर ले बनाके बाँसुरिया ओ सांवरिया! राह तकते नयन मेरे पथरा गये आ गये स...
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Sunday, August 22, 2010

रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर ***********

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  नहीं चाहिए मुझको हिस्सा माँ-बाबा की दौलत में चाहे वो कुछ भी लिख जाएँ भैया मेरे ! वसीयत में नहीं चाहिए मुझको झुमका चूड़ी पायल और क...
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Dr. kavita 'kiran' (poetess)
Falna, Rajasthan, India
कलम अपनी,जुबां अपनी, कहन अपनी ही रखती हूँ, अंधेरों से नहीं डरती "किरण" हूँ खुद चमकती हूँ, ज़माना कागजी फूलों पे अपनी जां छिड़कता है मगर मैं हूँ की बस अपनी ही खुशबू से महकती हूँ-- **** इस ब्लॉग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का मकसद फ़क़त एक कोशिश है ख़ुद को ख़ुद से बाहर लाने की। बहुत कुछ अनकहा कह देने की। अपने खास लम्हों की कहन को आम कर देने की। इस ब्लॉग के जरिये मैं ख़ुद को समेटकर अपनी अनुभूतियों के विस्तृत आकाश को दुनिया के सामने फैला रही हूँ और दावत देती हूँ सभी काव्यप्रेमियों को अपने इस सृजन के आकाश में उडान भरने के लिए। दरअसल जिंदगी के कैनवास पर वक्त की तूलिका ने जब, जिन रंगों से, जो चित्र उकेरे, यह ब्लॉग उसी की एक चित्रावली है. एक शब्दावली, जो आपके कानों तक पहुंचना चाहती है। एक द्रश्यावली जो आपकी नज़र को छू के गुजरना चाहती है, आपके सामने है। सफर में हूँ । मंजिल तक पहुंचना चाहती हूँ। कब पहुँचती हूँ ! देखते हैं*******
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