डॉ.कविता'किरण'( कवयित्री) Dr.kavita'kiran' (poetess)

नाम मेरा 'किरण' है ऐ साहिब!मेरे अंदर मेरा उजाला है-डॉ.कविता"किरण" I AM LIGHT OF LOVE,LET ME SPREAD IN YOUR HEART AND YOUR LIFE-Dr.kavita'kiran'

Sunday, May 29, 2011

अमृत पीकर भी है मानव मरा हुआ............

›
अमृत पीकर भी है मानव मरा हुआ बरसातों में ठूंठ कहीं है हरा हुआ करके गंगा - स्नान धो लिए सारे पाप सोच रहे फिर सौदा कितना ...
16 comments:
Monday, April 11, 2011

अनछुआ स्पर्श सिहरन दे गया.....[एक गीत श्रृंगार का]

›
संदली सांसों को चन्दन दे गया अनछुआ स्पर्श सिहरन दे गया पतझड़ी सपनो को सावन दे गया अनछुआ स्पर्श सिहरन दे गया मोम - सी पल -...
15 comments:
Wednesday, March 30, 2011

सूरत है ख़ूबसूरत अंदाज़ आशिकाना...

›
सूरत है ख़ूबसूरत अंदाज़ आशिकाना मेरा नाम शायरी है मुझे दाद देते जाना कभी गीत बन गयी हूँ कभी बन गयी ग़ज़ल मैं मुझे गुनग...
8 comments:
Thursday, March 17, 2011

फागुन की शाम आई फागुन की शाम..(सभी मित्रों को होली की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ इस बार एक गीत प्रस्तुत कर रही हूँ..)

›
(जयपुर में होली पर आयोजित महामूर्ख सम्मलेन में) फागुन की शाम आई फागुन की शाम मस्ती में डूबा है सारा ब्रज - धाम फागुन की शाम आई फा...
13 comments:
Monday, February 14, 2011

उनसे आँखों ही में होती है लड़ाई मेरी....

›
उनसे आँखों ही में होती है लड़ाई मेरी थाम लेते हैं सनम जब भी कलाई मेरी आईनों ! शोख मिजाजी में हया के तेवर मुझको तस्वीर नई...
13 comments:
Tuesday, February 1, 2011

दुबई-यात्रा 27 जन २०११....

›
With Shayer Dr. Peerzada Qasim ( The vice chancellor of Qarachi university,Pakistan) Dubai 27 jan २०११ ...
7 comments:
Friday, January 21, 2011

दिल जलता है दीपक जैसे....कवियत्री डॉ कविता'किरण' का 27 जन 2011 को दुबई में काव्य-पाठ--...

›
Bharteeya dootawas ki aur se 27 jan 2011 ko Gantantra diwas ke shubh avsar per "Dubai shopping festival' DUBAI mein aayojit kavi s...
11 comments:
Thursday, January 6, 2011

श्रंगार का एक छंद...

›
ऋतुओं की रानी हूँ मै शरद सुहानी हूँ फागुन में होली रस - रंग की बहार हूँ ! चमकूँ बिजुरिया - सी बरसूँ बदरिया - सी सावन में र...
5 comments:
Monday, December 20, 2010

हर तरफ उनके ख़यालों की महकती बज़्म है......

›
हर तरफ उनके ख़यालों की महकती बज़्म है आजकल ये दिन शुरू उन से उन्ही पर ख़त्म है आप ही से हर ग़ज़ल है आप ही की न...
15 comments:
‹
›
Home
View web version

ABOUT ME

My photo
Dr. kavita 'kiran' (poetess)
Falna, Rajasthan, India
कलम अपनी,जुबां अपनी, कहन अपनी ही रखती हूँ, अंधेरों से नहीं डरती "किरण" हूँ खुद चमकती हूँ, ज़माना कागजी फूलों पे अपनी जां छिड़कता है मगर मैं हूँ की बस अपनी ही खुशबू से महकती हूँ-- **** इस ब्लॉग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का मकसद फ़क़त एक कोशिश है ख़ुद को ख़ुद से बाहर लाने की। बहुत कुछ अनकहा कह देने की। अपने खास लम्हों की कहन को आम कर देने की। इस ब्लॉग के जरिये मैं ख़ुद को समेटकर अपनी अनुभूतियों के विस्तृत आकाश को दुनिया के सामने फैला रही हूँ और दावत देती हूँ सभी काव्यप्रेमियों को अपने इस सृजन के आकाश में उडान भरने के लिए। दरअसल जिंदगी के कैनवास पर वक्त की तूलिका ने जब, जिन रंगों से, जो चित्र उकेरे, यह ब्लॉग उसी की एक चित्रावली है. एक शब्दावली, जो आपके कानों तक पहुंचना चाहती है। एक द्रश्यावली जो आपकी नज़र को छू के गुजरना चाहती है, आपके सामने है। सफर में हूँ । मंजिल तक पहुंचना चाहती हूँ। कब पहुँचती हूँ ! देखते हैं*******
View my complete profile
Powered by Blogger.