दिनांक 6,7,8 सितम्बर2010 को नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित होनेवाले तीन दिवसीय हिंदी समारोह में भागलेनेहेतु "भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद्"( ICCR) दिल्ली, की ओर से भेजे जानेवाले प्रतिनिधि मंडल में फालना,राजस्थान की कवयत्री डॉ कविता"किरण" को भी शामिल किया गया है। (५ से १० सित।तक नेपाल-यात्रा पर रहूंगी. सभी मित्रों की शुभकामनाये और आशीर्वाद अपेक्षित है...)
नहीं चाहिए मुझको हिस्सा माँ-बाबा की दौलत में चाहे वो कुछ भी लिख जाएँ भैया मेरे ! वसीयत में
नहीं चाहिए मुझको झुमका चूड़ी पायल और कंगन नहीं चाहिए अपनेपन की कीमत पर बेगानापन मुझको नश्वेर चीज़ों की दिल से कोई दरकार नहीं संबंधों की कीमत पर कोई सुविधा स्वीकार नहीं माँ के सारे गहने-कपड़े तुम भाभी को दे देना बाबूजी का जो कुछ है सब ख़ुशी ख़ुशी तुम ले लेना चाहे पूरे वर्ष कोई भी चिट्ठी-पत्री मत लिखना मेरे स्नेह-निमंत्रण का भी चाहे मोल नहीं करना नहीं भेजना तोहफे मुझको चाहे तीज-त्योहारों पर पर थोडा-सा हक दे देना बाबुल के गलियारों पर रूपया पैसा कुछ ना चाहूँ..बोले मेरी राखी है आशीर्वाद मिले मैके से मुझको इतना काफी है
तोड़े से भी ना टूटे जो ये ऐसा मन -बंधन है इस बंधन को सारी दुनिया कहती रक्षाबंधन है
तुम भी इस कच्चे धागे का मान ज़रा-सा रख लेना कम से कम राखी के दिन बहना का रस्ता तक लेना **************** कविता"किरण" ***रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएं***
watch me on DD1 (national channal) at 7।15 pm to 8pm on 26 may (wednesday) in programme "Chalo chakradhar chaman mein" n the topic is "Vradhhashram" जिसका पुनः प्रसारण डी डी भारती पर शुक्रवार शाम ७.३० और रविवार रात १०.३० पर देखें और कृपया अपनी राय भी दें। धन्यवाद.