
वही रात-रात का जागना
वही ख़ुद को ख़ुद में तलाशना
वही बेख़ुदी, वही बेबसी
वही अपने आप से भागना!
वही जिंदगी, वही रंज़ो-ग़म
वही बेकली, वही आँख नम
वही रोज़ ही, इक दर्द से
करना पड़े हमें सामना !
वही रोना इक-इक बात पर
तकिये से मुंह को ढांपकर
सर रख के अपने हाथ पर
खाली हवाओं को ताकना !
वही आंसुओं का है सिलसिला
वही ज़ीस्त से शिकवा-गिला
वही इश्क़ सांवली रात से
वही जुगनुओं को निहारना!
कभी रो के काटी ये ज़िंदगी
कभी पा गये थोड़ी खुशी
कभी आफताब का नूर था
कभी छा गया कोहरा घना !
*******************
डॉ.कविता 'किरण'
वही ख़ुद को ख़ुद में तलाशना
वही बेख़ुदी, वही बेबसी
वही अपने आप से भागना!
वही जिंदगी, वही रंज़ो-ग़म
वही बेकली, वही आँख नम
वही रोज़ ही, इक दर्द से
करना पड़े हमें सामना !
वही रोना इक-इक बात पर
तकिये से मुंह को ढांपकर
सर रख के अपने हाथ पर
खाली हवाओं को ताकना !
वही आंसुओं का है सिलसिला
वही ज़ीस्त से शिकवा-गिला
वही इश्क़ सांवली रात से
वही जुगनुओं को निहारना!
कभी रो के काटी ये ज़िंदगी
कभी पा गये थोड़ी खुशी
कभी आफताब का नूर था
कभी छा गया कोहरा घना !
*******************
डॉ.कविता 'किरण'