Wednesday, September 14, 2011

ज़िन्दगी इस तरह क्यों आई हो, मानो सीलन-भरी रज़ाई हो...


ज़िन्दगी इस तरह क्यों आई हो
मानो सीलन-भरी रज़ाई हो

यूँ तो मेरी ही ज़िन्दगी हो तुम

फिर भी क्यों लग रही पराई हो

जो बुरे वक़्त ने है दी मुझको

तुम वही मेरी मुंह-दिखाई हो

रंजो-गम,अश्क,आह,तन्हाई

जाने क्या साथ ले के आई हो

बोझ साँसों का सह नहीं पाए

तुम वो कमज़ोर चारपाई हो

तुम पे कैसे यक़ीं कोई कर ले

तुम कभी जून हो जुलाई हो

मुद्दतों तक कुनैन खाई है

अब तो तक़दीर में मिठाई हो

लो मुकम्मल हुई ग़ज़ल आख़िर

वाह जी वा 'किरण' बधाई हो
-कविता"किरण"



17 comments:

  1. वाह...किरण जी आपने मार डाला ....

    ReplyDelete
  2. वाह...किरण जी आपने मार डाला ....नीरजा

    ReplyDelete
  3. सीलन भरी रजाई...वाह...बहुत नया प्रयोग किया है आपने...दाद कबूल करें...

    नीरज

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर मनभावन अभिव्यक्ति|

    ReplyDelete
  5. क्या हुआ..?
    क्या हुआ जो हिन्दू हो गए हम
    मुसलमाँ भी हो सकते थे
    सिख,ईसाई,बोद्ध,पादरी
    कुछ भी हो सकते थे
    यह तो खुदा की मर्ज़ी थी
    जो हमको हिन्दू बनाया
    अच्छी शिक्षा दिलवाई
    और प्यार से जीना सिखाया
    अल्ला ईश्वर बाहेगुरु,ईसा
    कुछ भी कर सकते थे
    दिल में हमारे प्यार की जगह
    नफ़रत भी भर सकते थे
    लेकिन ऐसा कुछ न किया
    हममें बिश्वास जगाया
    शुक्रगुज़ार हैं उस दाता के
    हमको इन्सान बनाया
    हमको इन्सान -------

    दीपक शर्मा 'कुल्लुवी'
    16 /9 /11
    09136211486

    ReplyDelete
  6. हिंदी में गजल लिखने की प्रथा को आपने
    ब-खूबी निभाया है. हर गजल एक नया चिंतन
    लिए हुये है. 'सीलन भरी रजाई' भी एक
    अच्छी प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है.
    धन्यवाद.
    आनन्द विश्वास.
    अहमदाबाद.

    ReplyDelete
  7. सच कहूँ तो मैं दीवाना हूं आपकी शायरी का ......
    आपके ब्लॉग पर आपकी आवाज़ में जो गजले हैं , कसम से रूह को छूती हैं , खास कर यह ग़ज़ल " फिर तुम वो ही बात करोगे , झगडा मेरे साथ करोगे " 100-150 बार तो सुन चूका हूं ! मेरी favorite गजलों में हैं ! मैं जगजीत जी की आवाज़ का दीवाना हूं , उसी तरह आपकी आवाज़ भी मेरी favorite हैं , मैं आप जी से जानना चाहता हूं की क्या आप जी की कोई ग़ज़ल एल्बम मार्केट में उपलब्ध हैं तो कृपा बताएं , आप जी की किताब " तुम्ही कुछ कहो ना " मैने पढ़ी हुई हैं , मुझे आप जी की गजलें बहुत अच्छी लगती हैं ! ग़ज़ल एल्बम के बारे मैं अवश्य बताएँ , मेरा इ - मेल हे - shayariorsahil@gmail.com

    Thanks

    ReplyDelete
  8. sahil ji apke blog per aapki sabhi nazme aur kavitayen kabile-daad hain..bahut bhavpoorn..apko padhkar achha laga...aap meri gazlon ko itna pyar dete hain..aur dil se sunte-sarahte hain jankar sukhad laga..CD available hai..chand dharti pe utarta kab hai..mail-kavitakiran2008@gmail.com....:)shukriya

    ReplyDelete
  9. नमस्कार

    आप जी मेरे ब्लॉग पर आए , अपना कीमती वक्त दिया उसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यबाद !
    जेसा के आपने बताया के आपकी एल्बम " चाँद धरती पे उतरता कब हैं " उपलब्ध हैं , कृपा करके बतला दें के मैं इस एल्बम को कहां से खरीद सकता हूं , मैं जिला ऊना ( हिमाचल प्रदेश ) का रहने वाला हूं और मैने यहाँ के बाज़ार में और आस पास के बाज़ारों में इस एल्बम के बारे में पता किया लेकिन यहाँ यह उपलब्ध नही थी , मैं बहुत बेचैन हूं आप की इस एल्बम को सुनने के लिए .... आपकी आवाज़ में जो जादू , जो कशिश हैं .. बेचैन कर रही हैं इस एल्बम को सुनने के लिए . आप की एक किताब " तुम्ही कुछ कहो ना " तो मैने पढ़ ली हैं कृपा अपनी अन्य किताबों ( हिंदी भाषा ) की जानकारी भी दे , के कहां से खरीदी जा सकती हैं ! मैं सब की सब पढना चाहता हूं ! आपसे मेल पर भी मैने जानना चाहा था , जब भी आप जी को वक्त लगे कृपा करके उपरोक्त जानकारी मुहेइया करवा देजेगा

    चरनबंदना

    साहिल

    ReplyDelete
  10. Hello sahil ji..
    THE books written by Dr kavita”kiran”(Poetess)---

    1-Dard ka safar (Gazals) Awarded
    2-Tum kahte ho to (kavitayen)
    3-Chupke-Chupke (Laghu kavitayen)
    4-Tumhi kuch kaho na! (Gazals)
    5-Ye to kewal pyar hai (Geet)

    --Aur Rajasthani Bhasha mein-

    6-Bakhat ri baatan (Gazals)Awarded
    7-Boli ra bann (Gazals)
    8-Mukhar moon (kavitayen) Price-125/-Rs each+courier charge.

    CD—1-"CHAND DHARTI PE UTARTA KAB HAI"
    2-“PHIR PHIR AAYA FAGUN”
    (Gazals written n sung by Dr kavita"kiran"-- Price-50/-Rs each+courier charge extra.)

    Available at-
    Akanksha prakashan, Nehru colony, Falna-306116(Raj)
    contact--09414523730
    Or
    Dr kavita’kiran’ Nehru colony, Falna-306116(Raj)

    ReplyDelete
  11. जिन्दगी इस तरह क्यों आई हो
    मानो सीलन भरी रजाई हो

    यूं तो मेरी ही जिन्दगी हो तुम
    फिर भी क्यों लग रही पराई हो

    जो बुरा वक़्त ने है दी मुझको
    तुम ही मेरी मुंह-दिखाई हो........
    बेहतरीन....और शिक्षाप्रद भी

    ReplyDelete