Friday, February 22, 2013

मुहब्बत का ज़माना आ गया है ....

मुहब्बत का ज़माना आ गया है 
गुलों को मुस्कुराना आ गया है 
नयी शाखों  पे देखो आज फिर वो 
नज़र पंछी पुराना आ गया है  

जुनूं को मिल गयी है इक तसल्ली
वफाओं का खज़ाना आ गया है

उन्हें भी आ गया नींदे उडाना
हमें भी दिल चुराना आ गया है

छुपाया था जिसे हमने हमी से
लबों पर वो फ़साना आ गया है

नज़र से पी रहे हैं नूर उसका
संभलकर लडखडाना आ गया है

मुहब्बत तो सभी करते हैं लेकिन 
 

हमें करके निभाना आ गया है

हमें तो मिल गया महबूब का दर
हमारा तो ठिकाना  आ गया है

हम अपने आईने के रु-ब-रु हैं
निशाने पर निशान आ गया है

अँधेरा है घना हर और तो क्या
"किरण"को झिलमिलाना आ गया है
 -डॉ कविता"किरण"

15 comments:

  1. वाह किरण जी वाह लाजवाब शानदार धारदार एक से बढ़कर एक अशआर हैं हार्दिक बधाई स्वीकारें.

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  2. ji shukriya arun ji apko gazal pan aayi..:)

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  3. श्रीमती वन्दना गुप्ता जी आज कुछ व्यस्त है। इसलिए आज मेरी पसंद के लिंकों में आपका लिंक भी चर्चा मंच पर सम्मिलित किया जा रहा है।
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (23-02-2013) के चर्चा मंच-1164 (आम आदमी कि व्यथा) पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  4. बहुत ही सुन्दर प्रेममयी प्रस्तुति...
    :-)

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  5. बहुत खूब. रस से भरी , प्रेम गगरी.
    सादर
    नीरज'नीर'

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  6. pratham avasar aapke geet "hathon me aagaya jo kal rumaal aapka..." se parichit hua ... saubhagya vash achanak hi Kota ke manch par aapko upasthit paya.......lambe antaral ke baad ek baar fir aapki rachnao ko sammukh paakar hardik ullasit anubhav karta hu...... prarthana karta hu.... shabd rachn jaari rahe.......
    Sharad Gupta

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    1. shukriya sharad ji..ap mere blog par aaye aur rachnao ko saraha...

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  7. बढ़ि‍या नज्‍म..बधाई

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  8. बहुत सुन्दर रचना

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  9. sach me ,,kiran ko jhilmilana aa gaya hai

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  10. waah khoob kavita ji bahut achchhi gazal kahi hai

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