Thursday, August 18, 2011

अधखुली आँख में सपन क्यों है....

अधखुली आँख में सपन क्यों है
खिल उठा देह का चमन क्यों है

सिमटा सिमटा-सा तन-सुमन क्यों है
और अदाओ में बांकपन क्यों है

मनचला हो गया है क्यों मौसम
बावरी हो गयी पवन क्यों है

सहमा सहमा हुआ-सा है दर्पण
अनमना अनमना-सा मन क्यों है

महका महका-सा है अँधेरा क्यूँ
दहका दहका हुआ-सा दिन क्यों है

कामनाएं हैं बहकी बहकी-सी
मन का चंचल हुआ हिरन क्यों है

हर सितम तुझपे जाँ छिड़कता है
तुझ में इतनी कशिश "किरण" क्यों है
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कविता"किरण"


6 comments:

  1. बहुत सुन्दर abhivyakti kiran जी .badhai .
    blog paheli no. 1

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  2. kiran mam bahut sundarta se shbdon ko gadhti hain .......... badhai

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  3. आपकी अभिव्यक्ति की कुशलता वाकई मुझे सम्मोहित कर गया . कविता पढ़कर मेरी अधखुली आँखों में भी कुछ सपन तैरने लगा है. मुझे पूर्ण विश्वास है की हमारे नन्हे से ब्लॉग " vivekmadhuban.blogspot.com" पर भी आपकी की "किरण" जरूर पड़ेगी

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  4. DR.KAVITA KIRAN JI MARMIK RACHANAYEN ,BAHT PASAND AAYI.SADHUWAD

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  5. सपन ka matlab kya hota hai

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