Friday, July 30, 2010

छुपके सिरहाने में रोते हैं , लोग दीवाने क्यों होते हैं



छुपके सिरहाने में रोते हैं
लोग दीवाने क्यों होते हैं

हर गहरी साजिश के पीछे
दोस्त पुराने क्यों होते हैं

बन गये दिल पर बोझ जो ऐसे
साथ निभाने क्यों होते हैं

हर युग में दिल के शीशे को
पत्थर खाने क्यों होते हैं

जब भी वक़्त बुरा आता है
अश्क बहाने क्यों होते हैं

जो रंजो-गम नाप पायें
वो पैमाने क्यों होते हैं

अश्कों से तर आँख हो फिर भी
लब मुस्काने क्यों होते हैं

'किरण' तेरी तिरछी नज़रों के
हम ही निशाने क्यों होते हैं
**************
डॉ कविता'किरण'

43 comments:

  1. छुपके सिरहाने में रोते हैं
    लोग दीवाने क्यों होते हैं
    ............
    बेहद भावुकता मे लिखा है आपने ......

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  2. सुंदर भाव ,अच्छी रचना ।

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  3. बन गये दिल पर बोझ जो ऐसे
    साथ निभाने क्यों होते हैं

    हर युग में दिल के शीशे को
    पत्थर खाने क्यों होते हैं

    सच्ची शायरी !
    बहुत बढ़िया!

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  4. सार्थक प्रस्तुति- साधुवाद!
    सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

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  5. सुन्दर रचना के साथ चित्र भी बहुत मेल खा रहा है!

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  6. हर गहरी साजिश के पीछे
    दोस्त पुराने क्यों होते हैं
    इसका उत्तर मिल जाए तो आदमी ठोकर ही न खाए कभी।
    अच्छी ग़ज़ल, जो दिल के साथ-साथ दिमाग़ में भी जगह बनाती है।

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  7. ब्लॉग का टेम्प्लेट बहुत अच्छा है।

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  8. हर गहरी साजिश के पीछे
    दोस्त पुराने क्यों होते हैं
    ................................
    वाह...वाह...वाह
    नायाब शेर....
    अपना एक शेर याद आ रहा है...
    ख़ज़र था किसके हाथ में ये तो पता नहीं,
    हैं दोस्त की तरफ़ से मैं ग़ाफ़िल ज़रूर था.
    .................................
    हर युग में दिल के शीशे को
    पत्थर खाने क्यों होते हैं.....
    सवाल जितना आसान....
    जवाब उतना ही मुश्किल...
    शानदार ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद.

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  9. एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
    आपकी चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं!

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  10. सीधी सरल भाषा में सीधी सरल बातें जो सीधी दिल में उतर गयी हैं...बहुत खूब...वाह ...

    नीरज

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  11. सुन्दर और सटीक रचना

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  12. हर गहरी साजिश के पीछे
    दोस्त पुराने क्यों होते हैं

    बेहतरीन!!

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  13. बहुत अच्छी प्रस्तुति।

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  14. कविताजी, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति है। इस ग़ज़ल में अंतर्निहित प्रश्नों के उत्तर देना आसान नहीं है। मानवीय भावनाओं, संवेगों और प्रवृत्तियों की उत्पत्ति के कारण ढूँढना बहुत ही जटिल कार्य है। ये तो आप जैसे विद्वद्जन ही ढूंढ सकते हैं।

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  15. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    सच्ची शायरी
    http://sometimesinmyheart.blogspot.com/

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  16. meri aazad rooh ko ab quide zism mat dena.badi mushkilo se kati he sazae zindagi maine

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  17. bahut bahut bahut bahut ... n 1000000000000 times bahut lagake bhi jo "bahut" kam pade utna sundar mam

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  18. उडन तश्तरी से पूर्णतया सहमत। बधाई स्वीकार करें।

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  19. अश्क तो अश्क है बहेगा जरूर
    रोने से ही नहीं रुक जाए तो भी कहेगा जरूर
    रोने से लकीर बनती है हंसने से मिट जाएगी
    रोना जरूरी तो नहीं हँस के अश्क बहाए जा
    ashok Manoram

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  20. Har achhi sajish ke peeche dost purane kyun hote hain ? Kya khoob andaz hai aap ka har kisi ko chakkar me dalne ka .
    Thanks .

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  21. ashko se tar aankh ho phir bhi lab muskrane kyo hote hain..

    ek-ek line dil ko chhune wali hai kavita ji

    Wahhh...

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  22. bahut khub likhti ho app
    wah wah kya baat hai apki kabita me

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  23. हर गहरी साजिश के पीछे
    दोस्त पुराने क्यों होते हैं
    kiraan jee ,
    pranam !
    vakai sunder rachna hai , oopar pesh ek sher aap ki nazar hai jo meri ppasand ka hai haalaki har sher damdaar hai ,
    sadhuwad
    saadar

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  24. आप सभी की टिप्पणियों का स्वागत सहित शुक्रिया.

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  25. ek khoobsurat nazm ukeri hai bariki se ...gud one!

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  26. छुपके न जाने क्यों रोते हैं
    लोग दीवाने क्यों होते हैं
    गजल बहुत भाव पूर्ण है।

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  27. bahut sundar or manmohak kavita....

    Meri Nai Kavita padne ke liye jaroor aaye..
    aapke comments ke intzaar mein...

    A Silent Silence : Khaamosh si ik Pyaas

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  28. दुखडा कासे कहूं सजनी

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  29. "जो रंजो-ग़म नाप न पायें,वो पैमाने क्यूं होते हैं।"
    बेहतरीन शे"र , सुन्दर गज़ल।

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  30. बहुत सुन्दर प्रस्तुति, उत्तम!

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  31. अच्छे शेर है। बधाई। आपकी किताब पढ्ने को कैसे मिल सकती है।

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  32. betreen najm

    maja aa gaya/
    hum bhi aapki tirchhi najar ke diwane ho gaye aaj se samjho to!
    aapki Najm , Mashaallaha aap hi ki tarha khoobsurat ban padi he!

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  33. कुछ लम्हों के कुछ पलछिन में,
    कुछ जश्न मनाने क्यों होते है..........
    दिन रात सिसकती आहो में,
    कुछ दर्द बेगाने क्यों होते है ..........
    हर ख्वाब अधूरे है जिनके
    वो लोग दीवाने क्यों होते है...........
    कविता की किरणों से जग को
    मशाल जलाने क्यों होते हैं............

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  34. hello didi ji aapki kavitayi mai daily padta hu or sunta hu....bahut accha lagta hai...apki kavitayi dil ko chu jane wali hai...

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  35. kavita ji apki kavita ne man moh liya aapne purane dosto ki yaad dila di

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  36. Replies
    1. BHAVO KO SABDO KA BAHUT HI SAJEEV CHITRAN KIYA HAI MAM AAPNE .........BAHUT BAHUT BADHAI

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  37. ग़ज़ल को ग़ज़ल कर दिया आपने

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